शिव शिव शंकरा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव शिव शंकरा

शिव शिव शंकरा

शिव शिव शंकरा

शिव शिव शंकरा

शिव शिव शंकरा

नमः शिवाय

शिव शिव शंकरा

नमः शिवाय

मेरे साथ चलना मेरे संग रहना-2

मेरे कष्टों को भष्म करना

शिव शिव शंकरा

नमः शिवाय

शिव शिव शंकरा

नमः शिवाय

माथे पे तेरे चंदा विराजे

गंगा जट्टा के बीच समाये शंकरा

काल भी तू है महाकाल तू है

त्रिलोक भी तू शिव भी तुही शंकरा

मेरा भोला है भण्डारी

करे सबकी ये रखवाली

चाहे राजा हो या भिखारी

सुनता सबकी बारी-बारी

शिव शिव शंकरा

नमः शिवाय

शिव शिव शंकरा

नमः शिवाय

शिव शिव शंकरा

शिव शिव शंकरा

शिव शिव शंकरा

शिव शिव शंकरा

गोदी में तेरे गनपत विराजे

तेरे अंग संग रहे गौरा मैया शंकरा

सर पे बिठा गौरा की सौतन

जिसे लोग कहते हैं गंगा मैया शंकरा

जट्टा विच गंगा बहती ऐ

द्वार्जा पुछदी रहन्दी ऐ

जट्टा विच गंगा बहती ऐ

द्वार्जा पुछदी रहन्दी ऐ

तू दस मेरे भोले

गंगा तेरी की लगदी ऐ....

तेरे दर पे आया बाबा

झोली खाली लाया बाबा

जल चढ़ाने आया बाबा

बड़ी दूर से आया बाबा

तेरे दर की शान निराली

संग बिठाये माँ गड काली

संग बिठाये भैरव बाबा

तू ही साधु अगंड दानी

शिव शिव शंकरा

नमः शिवाय

शिव शिव शंकरा

नमः शिवाय

मेरे साथ चलना मेरे संग रहना-2

मेरे कष्टों को भष्म करना

शिव शिव शंकरा

नमः शिवाय

शिव शिव शंकरा

नमः शिवाय

शिव शिव शंकरा

शिव शिव शंकरा

शिव शिव शंकरा

शिव शिव शंकरा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।