छोटी से किशोरी मेरे अंगना में डोले रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

छोटी से किशोरी मेरे अंगना में डोले रे,

पाव में पजनिया बाजे शम शम करती डोले रे,

मैंने व सा पूछो लाली कौन गाव की बेटी रे,

वो तो तोतली बोली बोले मैं तो बरसाने बेटी रे,

छोटी से किशोरी मेरे अंगना में डोले रे,

मैंने व सा पूछो लाली माखन मिश्री खाओ गी,

आहा आहा करके मेरे आगे पीछे धोले रे,

छोटी से किशोरी मेरे अंगना में डोले रे...........

मैंने व सा पूछो लाली कहा तिहरा नाम है,

अरे मुस्काए के यु बोली राधा रानी मेरो नाम है,

मैंने व सा पूछो लाली कहा तेरी ससुराल है,

अरे गूंधत कर के बोली मेरो नन्द गाव ससुराल है,

मैंने व सा पूछो लाली कौन तेरा भरदार है,

अरे शर्मा के यु बोली मेरी श्याम सुन्दर भरदार है,

पाव में पजनिया बाजे शम शम करती डोले रे,,

मैंने व सा पूछो लाली माखन मिश्री खाओ गी,

आहा आहा करके मेरे आगे पीछे डोले रे,

छोटी से किशोरी मेरे अंगना में डोले रे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।