नाच रहे है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

नाच रहे है डमरू की ताल पे,

शिव शंभु जैसे नए साल पे,

हर हर महादेव लोगो की जुबां पे,

नशा ऐसा छाया है,

महादेव की ये ये माया है,

आज भोले का दिन ये आया है,

भगतो ने फिर से मनाया है,

भोले का सुरूर ये छाया है,

फिर से सावन ये आया है.....

खौफ फैला दो नाम का,

भोले के मेरे नाम का,

शिव शंभु के जाम का,

ये भोले की ये शाम का,

नाच रहे हैं भोले की बीट पे,

चलता गाना फुल रिपीट पे,

आंधी तूफ़ान से न डरते,

भोले का नाम लिया करते है,

भूतकाल को भूल जा,

वर्तमन अभी बाकि है,

महादेव की लहर है,

तूफ़ान अभी बाकी है,

भोले मेरे भोले मेरे भोले भंडारी.....

शिव की शक्ति शिव की भक्ति जैसे मेरा काम है है,

हर हर महादेव है भोले उसका नाम है,

भोले का ये दरबार है भोले ही पालनहार है,

सजा दे ये माफ़ी दे भोले की ये सरकार है,

पीता हू मैं भाँग रगड़ के भोले तेरे नाम से,

चलती है ये दुनीया सारी तेरे ही ये काम से,

काम मेरे महाकाल के नाम मेरे महाकाल के,

बैठा हू सुबह शाम से तेरे ही ये नाम से,

भोले मेरे भोले मेरे भोले भंडारी…….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।