देश मेरे

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॥ पावन पाठ ॥

ओ देश मेरे

तेरी शान पे सदके

कोई धन है क्या

तेरी धूल से बढ़ के

तेरी धूप से रौशन

तेरी हवा पे जिंदा

तू बाग है मेरा

मैं तेरा परिंदा

है अरज़ ये दीवाने की

जहाँ भोर सुहानी देखी

एक रोज़ वही

मेरी शाम हो

कभी याद करे जो जमाना

माटी पे मर मिट जाना

ज़िकर में शामिल

मेरा नाम हो

ओह देश मेरे

तेरी शान पे सदके

कोई धन है क्या

तेरी धूल से बढ़ के

तेरी धूप से रौशन

तेरी हवा पे जिंदा

तू बाग है मेरा

मैं तेरा परिंदा

आंचल तेरा रहे मां

रंग बिरंगा ओह

ऊंचा आसमान से

हो तेरा तिरंगा

जीने की इज़ाजत देदे

या हुकुम शहादत देदे

मंजूर हममें जो भी तू चुने

रेशम का हो मधुशाला

या कफन सिपाही वाला

ओढेंगे हम जो भी तू बूने

ओह देश मेरे

तेरी शान पे सदके

कोई धन है क्या

तेरी धूल से बढ़ के

तेरी धूप से रौशन

तेरी हवा पे जिंदा

तू बाग है मेरा

मैं तेरा परिंदा.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।