चली मेरी मात भवानी रे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

चली मेरी मात भवानी रे,

माई सुनी लगे नगरीया,

चली मेरी मात भवानी रें,

माई सुनी लगे नगरीया।।

नौ दिन आई करन मेहमानी,

घर घर जगदम्बा महारानी -2

नैनन बरसे पानी रे,

माई सुनी लगे नगरीया,

चली मेरी मात भवानी रें,

माई सुनी लगे नगरीया।।

बात कहूं क्या अपने दिल की,

आज रुके ना रोके हिलकी -2

ये गलियां लगे वीरानी रे,

माई सुनी लगे नगरीया,

चली मेरी मात भवानी रें,

माई सुनी लगे नगरीया।।

अपने रथ से उतर तुम आओ,

मैया कुछ दिन और रुक जाओ -2

मगर मेरी बात ना मानी रे,

माई सुनी लगे नगरीया,

चली मेरी मात भवानी रें,

माई सुनी लगे नगरीया।।

अखियां भगतन की भर आई,

माई तोरी कैसे करूँ विदाई,

कहे ‘बेनाम’ कहानी रे,

माई सुनी लगे नगरीया,

चली मेरी मात भवानी रें,

माई सुनी लगे नगरीया.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।