माँ

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

धुप जब सताए,

आँचल से धक लेती हो,

चोट जब भी आये ,

संग मेरे रो देती हो ,

ताबीज जो मैं निकाल दूं ,

परेशां हो जाती हो ,

तुम किसी की बुरी नज़र लग जायेगी ,

प्यार से बताती हो तुम ,

ओ माँ...याद आती हो

ओ माँ याद आती हो

ओ माँ याद आती हो......

मुझे भी फिकर तेरी है

माँ पर मैं कहता नहीं

तेरा यूँ चुप रहना माँ

अच्छा मुझे लगता नहीं

ओ माँ....याद आती हो

ओ माँ याद आती हो

ओ माँ याद आती हो......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।