श्यामा प्यारे आजा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

श्यामा प्यारे आजा....

श्यामा प्यारे आजा, व्याकुल भरी ये राधा,

तुझ बिन अखियां तरस गयी है,

अब तो दर्श दिखा जा, श्यामा प्यारे आजा।

सूना सूना गोकुल है, छायी ख़ामोशी गलियन में,

मुरझाई सब कलियाँ है, फूल खिले न कुंजन में,

लेकर आंसू अँखियन में, रोती गईया मधुवन में,

प्यासे मन की ओह निर्मोही, अब यतो प्यास बुझा जा।

श्यामा प्यारे आजा....

श्यामा प्यारे आजा, व्याकुल भरी ये राधा.....

सूना तट सुना पनघट, सूनी युमना धारा है,

जब से गए हो तुम श्यामा, रोता ब्रीज ये सारा है,

द्वार बाल और ब्रिजबाला ,पूछे कहा गया काला,

ओ बेदर्दी अब तो आकर हमको गले लगा जा।

श्यामा प्यारे आजा....

श्यामा प्यारे आजा, व्याकुल भरी ये राधा.....

याद तेरी तड़पाये है, हमको कुछ नहीं भाये है,

हमको नींद नहीं आती, चैन जिया नहीं पाए है,

अब तो रास रचा जा तू, मुरली मधुर बजा जा तू,

व्याकुल मन नहीं धीर धरे है, आकर के समझा जा।

श्यामा प्यारे आजा....

श्यामा प्यारे आजा, व्याकुल भरी ये राधा.....

कान्हा तुम कब आओगे, हमको दर्श दिखाओगे,

रखी भरी मटकी, आकर कब तुम खाओगे,

मुरली मधुर सुनाओगे, कब तुम रास रचाओगे,

प्यारे कन्हैया, दाऊ के भईया, आके प्रीत निभा जा।

श्यामा प्यारे आजा....

श्यामा प्यारे आजा, व्याकुल भरी ये राधा,

तुझ बिन अखियां तरस गयी है,

अब तो दर्श दिखा जा, श्यामा प्यारे आजा।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।