तुझे कब से श्याम पुकार रही

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तुझे कब से श्याम पुकार रही

काजल डलवा ले अँखियन में....-2

तेरा मोर मुकुट मँगवा दूँगी

तेरे माथे पे सजवा दूँगी

संग केसर ख़ूब लगा दूँगी

काजल डलवा ले अँखियन में

तुझे कब से श्याम पुकार रही

काजल डलवा ले अँखियन में....

तेरे हीरे के हार मँगवा दूँगी

तेरे गले में सजवा दूँगी

हीरे मोती से जड़वा दूँगी

काजल डलवा ले अँखियन में

तुझे कब से श्याम पुकार रही

काजल डलवा ले अँखियन में...

तेरा पीला पिताम्बर ला दूँगी

वा में गोटा किनारी लगा दूँगी

तेरे काँधे पे सजवा दूँगी

काजल डलवा ले अँखियन में

तुझे कब से श्याम पुकार रही

काजल डलवा ले अँखियन में.....

तुझे चाँदी की पायल ला दूँगी

वा में घुँघरीया डलवा दूँगी

तेरे पैरों में सजवा दूँगी

काजल डलवा ले अँखियन में

तुझे कब से श्याम पुकार रही

काजल डलवा ले अँखियन में

तुझे बरसाने बुलवा लूँगी

तेरी राधा से मिलवा दूँगी

तेरी कामरिया सजवा दूँगी

काजल डलवा ले अँखियन में

तुझे कब से श्याम पुकार रही

काजल डलवा ले अँखियन में

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।