बाबा महाकाल की नगरी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

महाकाल की उज्जैनी को बारम्बार प्रणाम , बारम्बार प्रणाम

दर्शन से सबके पूरण हो सब काम , पूरण हो सब काम

बाबा महाकाल की नगरी घणी प्यारी लागे , घणी प्यारी लागे

म्हाने प्यारो प्यारो क्षिप्रा जी रो पाणी लागे...-2

भोले भोले भोले भोले.....

रामघाट पर नहिने देखूं राम मंदिर अति सुंदर,

वहीं से थोड़ा आगे चालू विक्रम जी को मंदिर...- 2

मैया हरसिद्धि की शोभा घणी प्यारी लागे , घणी प्यारी लागे

म्हाने प्यारो प्यारो क्षिप्रा जी रो पाणी लागे

ओ बाबा महाकाल की नगरी घणी प्यारी लागे , घणी प्यारी लागे

म्हाने प्यारो प्यारो क्षिप्रा जी रो पाणी लागे....

बड़ा गणेश और महाकाल का दर्शन करवा जाऊँ,

बीच बजार में खड़ो कन्हियो ऊ की शरण में जाऊँ....- 2

ओ की मूरत से प्रीत पुरानी लागे , हाँ पुरानी लागे

म्हाने प्यारो प्यारो क्षिप्रा जी रो पाणी लागे

ओ बाबा महाकाल की नगरी घणी प्यारी लागे , घणी प्यारी लागे

म्हाने प्यारो प्यारो क्षिप्रा जी रो पाणी लागे...

भोले भोले भोले भोले....

ढाबा रोड पर बनी हवेली श्री नाथ जी की सुंदर,

गेबी साभ हनुमान विराजे वहीं गली के अन्दर.....- 2

उनका हृदय में सियाराम की झांकी प्यारी लागे , घनी प्यारी लागे

म्हाने प्यारो प्यारो क्षिप्रा जी रो पाणी लागे

ओ बाबा महाकाल की नगरी घणी प्यारी लागे , घणी प्यारी लागे

म्हाने प्यारो प्यारो क्षिप्रा जी रो पाणी लागे

चिंतामण गढ़कालिका का दर्शन करने जाऊँ,

सिद्धनाथ और मंगलनाथ पे जाकर शीश नमाऊं.... - 2

काल भैरव जी की महिमा तो निराली लागे , हाँ निराली लागे

म्हाने प्यारो प्यारो क्षिप्रा जी रो पाणी लागे

ओ बाबा महाकाल की नगरी घणी प्यारी लागे , घणी प्यारी लागे

म्हाने प्यारो प्यारो क्षिप्रा जी रो पाणी लागे

भोले भोले भोले भोले.....

उज्जैनी का हर कंकर में रेवे भोला शंकर,

उनकी महिमा में कई जानु ई है सबका अंदर...- 2

या के संत मुनि की प्रीत बड़ी प्यारी, बड़ी प्यारी लागे

म्हाने प्यारो प्यारो क्षिप्रा जी रो पाणी लागे

ओ बाबा महाकाल की नगरी घणी प्यारी लागे , घणी प्यारी लागे

म्हाने प्यारो प्यारो क्षिप्रा जी रो पाणी लागे

भोले भोले भोले भोले.......

भोले भोले भोले भोले......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।