भोले का भगत

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मेरे भोले नाथ- मेरे शम्भू- शंकर भोलेया......

जय जय शंकर नमा: शंकर.....

हो.........

मैं तो भोले का भगत हूँ,

मैं तो शिव का भगत हूं

भोले का भगत हूँ, शिव का भगत हूँ....-2

बन्दा बड़ा सखत् हूँ.........

मैं तो भोले का.......

शिव के नाम का प्याला पियूं मैं,

दम मार के मस्त रहूं मैं -2

बम बम भोले बम कहूँ मैं......

अकड़ बम बबम- बकड़ बम बबम बकड़ बम बबम बम लहरी...-2

मैं तो भोले का....

शिव अभयंकर शिव प्रल्यंकर,

शिव का रूप है हर कण् कंकड़ -2

शिव हैं भय से भयंकर.......

हे प्रेतनाथ हे भूतनाथ हे भिलेनाथ जय जय शम्भू.... -2

मैं तो भोले का.....

तप अघोर शमशान के वासी,

मस्तक चंद्र कैलाश के वासी -2

औघड़ दानी जय अविनाशी.........

त्रिशूल है कर में विराजे जटाजूट मे गंगा साजे.....-2

गंगा साजे.....

मैं तो भोले का....

ओम् नमः शिवाय....

चरणो मे तेरे शीश नवाय,

वीर प्रतीश भजन तेरे गाये- 2

नाचे गायें धूम मचायें............

डम डमक डम डमरू बाजे सतिपति का डमरू बाजे डम डमक डम डमरू बाजे पार्वती संग भोला नाचे

मैं तो भोले का भगत हूँ,

मैं तो शिव का भगत हूं.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।