ओ संसार बनाने वाले

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ओ संसार बनाने वाले, तेरे जलवे अजब निराले

खूब कमाल किया है तूने सब को अचरज में है डाले

ओ संसार बनाने वाले……….

आसमान पर पानी का कहीं मिलता निशां नहीं, मिलता निशान नहीं है. -2

पल में तेरी माया बदले फिर अनुमान नहीं है, फिर अनुमान नहीं है -2

आए बादल काले – पीले, उमड़ – घुमड़ कर वो मतवाले

लगा बरसने मूसलाधार, थल पर जल के बह जाए नाले…….

ओ संसार बनाने वाले…………

आप बना सागर का पानी, बादल बन कर छाया – 2

लगा पिघलने फिर सागर पर, सीप ने था मुँह बाया – 2

पी के बूँद वो मोती ढ़ाले चमक दमक में बड़े मतवाले

हार बनाते जिनके जोहरी, उसको पहने लक्की लाले

ओ संसार बनाने वाले…………

बड़ा जिस्म हाथी को दिया पर दी क्यूँ छोटी आँखे – 2

हिरन बनाया एक छोटा सा जिसकी मोटी आँखे – 2

कोयल काली, कौए काले, किसके बच्चे किसने पाले

कैसा भेद रचाया तुमने, ताकत किस में भेद निराले

ओ संसार बनाने वाले………..

बाग लगाए, फूल खिलाए, महक रही फुलवारी

सूरज चांद सितारे खिलाए, ज्योति झलाझल झारी

हरे-भरे जंगल हरियाले, रचे समुंदर पहाड़ विशाले

रची जमीन, बसाई दुनिया तूने काम तमाम संभाले

ओ संसार बनाने वाले………….

लख चौरासी जीव रचाए, मानव बड़ा बनाया -2

कर्मों के अनुसार भाग्य का चक्कर खूब चलाया -2

कोई राज खजाना पाले कोई भूखा जान गंवा ले

ओ प्रभु मतवाले प्यारे, सारे जग को नाच नचा ले

ओ संसार बनाने वाले………….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।