भोले तेरी बंजारन

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

बंजारन मैं बंजारन,

भोले तेरी बंजारन...-2

बैजनाथ मैं गई,

विश्वनाथ भी गई,

दर्शन करके धन्य हुई,

अब दीवानी हो गई,

रे जोगिया,

बंजारन मैं बंजारन,

भोले तेरी बंजारन ॥

अविनाशी हे कैलाशी,

रामेश्वर हो या काशी,

द्वादश ज्योतिर्लिंग घूमी,

फिर भी ये अखियाँ प्यासी,

काश्मीर, चेन्नई, कोलकाता, मुंबई,

नगर-नगर और गाँव-गाँव में,

तेरे रूप कई रे जोगिया,

बंजारन मैं बंजारन,

भोलें तेरी बंजारन ॥

श्रद्धा से कावड़ लेकर,

लाखों कावड़िये आते,

तेरी जयनाद बोलते,

गंगाजल तुम्हे चढ़ाते,

देख बाबरी भई,

जनवरी हो या मई,

भक्तो का अम्बार लगा तेरे,

नाचू था था थई रे जोगिया,

बंजारन मैं बंजारन,

भोलें तेरी बंजारन ॥

चरणों में अपने बाबा,

मुझको भी दे दो छैया,

त्रिपुरारी दृष्टि कर दो,

चल जाए मेरी नैया,

उमा लहरी है नई,

और कॉम्पिटिशन कई,

आशीर्वाद अगर मिल जाए,

गाऊं गीत कई, रे जोगिया,

बंजारन मैं बंजारन,

भोलें तेरी बंजारन ॥

बंजारन मैं बंजारन,

भोले तेरी बंजारन,

बैजनाथ मैं गई,

विश्वनाथ भी गई,

दर्शन करके धन्य हुई,

अब दीवानी हो गई,

रे जोगिया,

बंजारन मैं बंजारन,

भोले तेरी बंजारन ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।