चल चलिये शिवालय

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

बेटे की बीमारी न इलाज हो गई है

पति पतनी दोनों संग चलिए ,

चलो चलिए... इक बार शिवालय चल चलिए……….

सुनलो फ़कीर की ये सच होगी वाणी,

आया सोमवार निकल चलिये,

चलो चलिए... इक बार शिवालय चल चलिए………

चारे डाक्टर वैद ओजा सब के सब हुए फेल है,

दाबा और बिमारी में कोई नही ताल मेल है,

सुमिरो प्यारे शिव शिवा को यही अंतिम आस है,

हर ने हर की हरी परिशानी जो भी इनका दास है,

बोलो बम बम बोलो बम बोलो शिव भगतो,

देर नही इक पल करिए,

चलो चलिए इक बार शिवालय चल चलिए……..

कावड चडाने की तो केवल सावन मास में महता है,

लेकिन बाबा बैद नाथ पर हर दिन कावड चड़ता है,

ना कुछ लगता पैसा रुपिया केवल भाव के भूखे है,

माँ की चुनरी शिव की भंगिया ले लो दोनों नुठे है,

आज तयारी करो पूरी दुखियारी सुबह सुबह भी चलो चलिए,

चलो चलिए इक बार शिवालय चल चलिए……..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।