चंचल मन बेचैन

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

चंचल मन बेचैन.....

चंचल मन बेचैन.....बहुत था।

पर जब से तेरी शरण मिली,

हे श्याम तेरी करुणा द्रिष्टि से,

रीझे प्यासे नैन।

चंचल मन बेचैन.....बहुत था....

कृष्ण नामरस पीकर और कोई,

रस ना मन को भाये,

रसना राधे राधे रटती,

अखियां श्याम समाये,

जगबंदन श्री श्याम मुरारी,

सोलह कला प्रभु हो श्रृंगारी,

देखे बिन नहीं चैन।

चंचल मन बेचैन.....बहुत था....

ऐसे तड़प रहा था मन ये

यु मछली बिन पानी,

क्षण भंगुर का माया मुझे

लगती रही मुझे सुहानी,

मृग दृषणा में घूम रहा था

झूठे मध् में झूम रहा था,

एक से थे दिन रैण।

चंचल मन बेचैन.....बहुत था....

रैण अँधेरी दिशा का ब्रम्ह था

पथरीली थी राहे,

पग पग पर ठोकर खाता था

भरती आत्म आहें,

पर जब तुमने बांह संभाली

चमक उठी सूरज की लाली,

मिटा अँधेरा गैन।

चंचल मन बेचैन.....बहुत था....

चंचल मन बेचैन.....बहुत था।

पर जब से तेरी शरण मिली,

हे श्याम तेरी करुणा द्रिष्टि से,

रीझे प्यासे नैन।

चंचल मन बेचैन.....बहुत था....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।