मेरी माँ दे नाम दी मस्ती

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरी माँ दे नाम दी मस्ती,

दसो केह्णु केह्णु चढ़ गई ए।

गल रहे ना ओस दे वसदी

जेहदी बांह मईया ने फड़ लई ऐ....-2

मेरी माँ दे नाम दी मस्ती.....

माँ दे नाम दी मस्ती विच

नच्दे चन्न सितारे,

कंजक बन के माँ नचदी

नाले नच्दे भगत प्यारे,

साडी डोर मईया ने फड़ लई ऐ....-2

मेरी माँ दे नाम दी मस्ती.....

चिंतपूर्णी चिंता हरदी

खाली ना कोई जावे,

जेड़ा आवे ओही तर जावे

मुहो मंगिया मुरादा पावे,

ए मस्ती बड़ी ए सस्ती

कुण्डी माँ नाल दिल दी अड़ गयी ऐ....-2

मेरी माँ दे नाम दी मस्ती.....

म.के नु दाती दर्श दिखादे

होर ना कुझ ओह मंगदा,

पैरा दी तू धुल बनाले

करदे लाल रंगदा,

लाली मेरी माँ दे रंग दी

मेरे तन मन विच चढ़ गयी ऐ....-2

मेरी माँ दे नाम दी मस्ती.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।