पागल नज़रे दिल दीवाना लगता है

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॥ पावन पाठ ॥

पागल नज़रे दिल दीवाना लगता है,

क्यों लग लग का प्यार दीवाना लगता है,

नजरो से जब ये नजरे मिल जाती है,

चारो तरफ से खोफ निशाना लगता है,

हुशन के सांचे में दुल्हन को सजाया है,

काशी मथुरा से ये सेहरा बन कर आया है,

मात पिता का सिर पर तेरे हर दम साया है,

तेरा ये जोड़ा अमीर रब ने बनाया है,

उनके दिल में आना जाना लगदा है,

फूल दुल्हन का प्यार दीवाना लगता है,

मैं तेरे आंचल के झूले में पली बाबुल,

जा रही हु छोड़ के तेरी गली बाबुल,

खूबसूरत ये फ़साने याद आये गये,

भूल कर भी हम तुम्हे न भूल पाए गये,

मुश्किल अक्षो को छुपना लगदा है

पागल नज़रे दिल दीवाना लगता है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।