भोले बाबा नन्दी पे आएंगे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

सिर पे बांध के जटाएं,

नाग गले में लटकाए,

तन पे भस्मी रमाए,

सोना बागंभर सजाए -2

गोरा दुलहन बनाके,

तुझे ले ही जाएंगे,

बन्ना बनके भोले बाबा तो नंदी पे आएंगे।

ब्रहमा विष्णु आगे पीछे,

भोले बाबा के सजेंगे,

पहले कहीं बजे ना होंगे,

ऐसे बाजे भी बजेंगे

शादी में ठुमके कई,

देव लगाएंगे,

बन्ना बनके भोले बाबा तो नंदी पे आएंगे।

पूरे तीन लोक में आया,

ऐसा आज खुशी का मौका

चर्चा करे देविया सारी,

चम चम चमके कोका

भोले शंकर जी आके,

तेरी मांग सजाएंगे,

बन्ना बनके भोले बाबा तो नंदी पे आएंगे।

सारी हिमाचल की नगरी,

देखो झूमे नाचे गाए

सारे देवता कमल सिंह,

यहाँ बनके बाराती आए

हम देखेंगे फिर,

तेरे कान फिराएँगे,

बन्ना बनके भोले बाबा तो नंदी पे आएंगे।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।