चले मेरे भोले का सिक्का

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हां धूम मची है हरिद्वार,

चलो भोले जी के द्वारे

ईस्ट वेस्ट और साउथ नॉर्थ,

गूंजे बम के जयकारे -2

कांधे पै कावड़ भोले की,

और माथे पे टीका,

चले मेरे भोले का सिक्का,

चले मेरे भोले का सिक्का.....

अपनी धून में मस्त रह कोई,

भांग का रगड़ा लावै सै,

अपने हाथा घोट घोट कै,

बम भोले नै प्यावै सै -2

कावड़िये और भांग बिना तो,

भोले का रंग फीका,

चले मेरे भोले का सिक्का,

चले मेरे भोले का सिक्का......

भोले जैसा देव नहीं सै,

और कोई भी दूजा जी

ऑल वर्ल्ड में करते हैं,

सब बम भोले की पूजा जी -2

जर्मन हो जापान चाहे,

फिर चाहे हो अमरिका,

चले मेरे भोले का सिक्का,

चले मेरे भोले का सिक्का....

भीमसेन भोले की नजर में,

कोई बड़ा ना छोटा जी,

भोले को तो सब है प्यारे,

खरा हो चाहे खोटा जी -2

तीन लोक और चौदह भवन में,

बम भोले का रुक्का,

चले मेरे भोले का सिक्का,

चले मेरे भोले का सिक्का।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।