मेरे रमण बिहारी लाल

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे रमण बिहारी लाल, तिहारी सूरत पे बलिहार -3

तेरा सुंदर रूप सलोना, चितवन में जादू टोना,

तूँ है जादूगर सरदार, तिहारी सूरत पे बलिहार,

मेरे रमण बिहारी लाल.....

तुम संग मेरे नैन लड़े, कोई और ना मन को भावे -2

तुम संग मेरे नैन लड़े, साँवरियाँ,

तेरे नैन मेरे नैन,

तेरे नैन चोर हैं तो मेरे नैन चकोर,

तुम संग मेरे नैन लड़े, कोई और ना मन को भावे,

ये मोहन, है तभी तो मुस्करा कर लूट लेते हैं,

ये टेढ़ी टेढी चितवन में फँसाकर लूट लेते हैं,

जिसे मोहब्बत देते हैं, उसे फिर कुछ नहीं देते,

जिसे मोहब्बत देते हैं, उसे फिर कुछ नहीं देते,

जिसे अपना बनाना हो, उसी को लूट लेते हैं,

मेरी ना मानों तो, इनसे दिल लगा कर देख लो सखियों,

जो हो तकदीर तेज तो, आजमा कर देख लो, सखियों,

कलेजे पर ज़रा, तीर खा कर देख लो, सखियों,

जो दिल इनको पसंद हो, उन्ही को लूट लेते हैं....

मोहना, आये ना.....

जिया डर डर जाए, नैना भर भर आये,

मन का पपीहा पी पी कहें,

मोहना, आये ना...

बिरहा में भीगा,

ये मन मेरा, फिर भी ना भीगा रे, आँचल तेरा,

ओ निर्मोही, नहीं को हरजोई,

मन का पपीहा पी पी कहें,

मोहना, आये ना...

जय राधा रमण बिहारी, जय राधा रमण बिहारी,

तेरी सूरत है प्यारी प्यारी,

जाऊँ बार बार बलिहारी,

जय राधा, जय राधा, जय राधा,

जय राधा रमण बिहारी, जय राधा रमण बिहारी......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।