मैं बंजारा घनश्याम का

संत सूरदास
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मैं बंजारा घनश्याम का

कोई पता बतादो श्याम का -2

मैं कुंज गलियों में गुमु

मैं जोगी हु ब्रजधाम का।

राधे राधे राधे.......

मैं बंजारा घनश्याम का........

मैं गया ढूंडने बरसाने

ना पता बताया राधा ने

मीरा से कहा वो भी बोली

मुश्किल श्याम के पाने में -2

मैं तो बस इतना जानू

मैं सेवक हु सुखधाम का।

मैं बंजारा घनश्याम का........

गया सुदामा की कुटिया

पूछा कहा श्याम रसिया

बोले थे सुदामा रो रो के

दर्शन ना कन्ईया जी ने दिया -2

मेरा यार मुझे ही भुला

वो राजा द्वारिका धाम का।

मैं बंजारा घनश्याम का........

मैंने कहा हे सूरदास

मुझे पहुंचा दो कान्हा के पास

श्याम के पग लिखने में मगन

हिर्दय में प्रभु का वास -2

रस्थान के द्वारे ढूंढा

किया फेरा श्वीसव धाम का।

मैं बंजारा घनश्याम का........

मैं कुंज गलियों में गुमु

मैं जोगी हु ब्रजधाम का।

राधे राधे राधे.......

मैं बंजारा घनश्याम का

कोई पता बतादो श्याम का.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।