तेरे फूलों से भी प्यार

श्री गौरव कृष्ण गोस्वामी जी महाराज
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरे फूलों से भी प्यार,

तेरे काँटों से भी प्यार -2

तू जो भी देना चाहे दे दे,

मेरे करतार।

तेरे फ़ूलों से भी प्यार,

तेरे काँटों से भी प्यार,

तू जो भी देना चाहे दे दे,

मेरे करतार.....

तेरी मर्जी में विधाता,

कोई छुपा बड़ा राज़ -2

दुनियाँ चाहे हमसे रूठे,

तू ना होना बस नाराज़,

तुमको नमन है बारमबार,

हमको कर ले तू स्वीकार,

तू जो भी देना चाहे दे दे,

मेरे करतार।

तेरे फ़ूलों से भी प्यार,

तेरे काँटों से भी प्यार,

तू जो भी देना चाहे दे दे,

मेरे करतार.....

हमको दोनों हैं पसंद,

तेरी धूप और छाँव -2

दाता किसी भी दिशा में ले चल,

जिंदगी की नाँव,

चाहे हमें लगा दे पार,

चाहे डुबो दे मझधार,

तू जो भी देना चाहे दे दे,

मेरे करतार।

तेरे फ़ूलों से भी प्यार,

तेरे काँटों से भी प्यार,

तू जो भी देना चाहे दे दे,

मेरे करतार.....

चाहे सुख दे या दुख,

चाहे ख़ुशी दे या ग़म

मालिक जैसे भी रखोगे,

वैसे रह लेंगें हम -2

चाहे ख़ुशी भरा संसार,

या देदे आंसुओं की धार,

तू जो भी देना चाहे दे दे,

मेरे करतार।

तेरे फ़ूलों से भी प्यार,

तेरे काँटों से भी प्यार,

तू जो भी देना चाहे दे दे,

मेरे करतार.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।