भारत जागो विश्व जगाओ

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॥ पावन पाठ ॥

भारत जागो विश्व जगाओ,

अपना दिव्य रुप प्रगटाओ -2

यही है जीवन सार करे,

नव शक्ति का संचार,

यही है जीवन सार करे,

नव शक्ति का संचार,

भारत जागों विश्व जगाओ,

अपना दिव्य रूप प्रगटाओ।।

पुज्य विवेकानंद पधारे, धन्य धरा हर्षायी,

अंधकार से भरी निशा मे, नई चेतना आयी,

विश्व पटल पर देखी सबने, ओजस्वी हुंकार... -2

भारत जागों विश्व जगाओ,

अपना दिव्य रूप प्रगटाओ।।

ऋषि मुनियों के अमर पुत्र हम, भूले अपना ग्यान,

पश्चिम के व्हा मोह मे उलझे, कर्म मिथ्या गुण गान,

प्रखर तेज हिन्दुत्व सुधा की, पुनः बहाई धार...-2

भारत जागों विश्व जगाओ,

अपना दिव्य रूप प्रगटाओ।।

दरिद्र भी नारायण अपना, सबको गले लगाओ,

दोष मुक्त हो समाज सारा, मिल जुल कदम बढाओ,

गौरव मय नव वैभव पूरित, करे स्वप्न साकार...-2

भारत जागों विश्व जगाओ,

अपना दिव्य रूप प्रगटाओ।।

यह जग है परिवार हमारा, धरती सबकी माता,

वायु जल आकाश अगन से, सबका जीवन नाता,

सृष्टि के सब सूत्र सवारे, जन जन का उद्धार....-2

भारत जागों विश्व जगाओ,

अपना दिव्य रूप प्रगटाओ।।

भारत जागों विश्व जगाओ,

अपना दिव्य रूप प्रगटाओ,

यही है जीवन सार करे,

नव शक्ति का संचार,

शक्ति का संचार......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।