मैं जहाँ भी रहूँ बरसाना मिले

पूनम यादव
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरे रंग में रंगा हर ज़माना मिले,

तेरे रंग में रंगा हर ज़माना मिले,

हाय तेरे रंग में रंगा ज़माना मिले,

तेरे रंग में रंगा ज़माना मिले,

मैं जहाँ भी, मैं जहाँ भी

मैं जहाँ भी रहूँ बरसाना मिले

मैं जहाँ भी रहूँ बरसाना मिले

हाँ मैं जहाँ भी रहू बरसाना मिले

मैं जहाँ भी रहू बरसाना मिले....

सारे जग में तेरा ही तो एक नूर है

सारे जग में तेरा ही तो एक नूर है

हाँ मेरा कान्हा भी तुझसे ही मशहूर है

मेरा कान्हा भी तुझसे ही मशहूर है

बदकिस्मत है वो जो तुझसे दूर है

बदकिस्मत है वो जो तुझसे दूर है

हाँ तुझसे दूर है, तुझसे दूर है

जो तुझसे दूर है, तुझसे दूर है

बदकिस्मत है वो जो तुझसे दूर है

बदकिस्मत है वो जो तुझसे दूर है

तेरे नाम का हर मस्ताना मिले

तेरे नाम का हर मस्ताना मिले

मैं जहाँ भी, मैं जहाँ भी

मैं जहाँ भी रहूँ बरसाना मिले

मैं जहाँ भी रहू बरसाना मिले

हाँ मैं जहाँ भी रहू बरसाना मिले

मैं जहाँ भी रहू बरसाना मिले....

तेरी रहमत के गीत गाने आया हूँ मैं

कई गुनाहो की सौगात लाया हूँ मैं

कर दो करुणा जगत का सताया हूँ मैं -2

हाँ दर पे आया हूँ मैं, दर पे आया हूँ मैं

हाँ आज आया हूँ मैं, आज आया हूँ मैं

कर दो करुणा जगत का सताया हूँ मैं

कर दो करुणा जगत का सताया हूँ मैं

रहमत का इशारा नजराना मिले

रहमत का इशारा नजराना मिले

मैं जहाँ भी, मैं जहाँ भी

मैं जहाँ भी रहूँ बरसाना मिले

मैं जहाँ भी रहू बरसाना मिले

हाँ मैं जहाँ भी रहू बरसाना मिले

मैं जहाँ भी रहू बरसाना मिले.....

तेरी पायल बंसी उनकी बजती रहे

जोड़ी प्रीतम प्यारे की सजती रहे

तेरे रसिकों पे छायी ये मस्ती रहे -2

हाय तेरी मस्ती रहे, तेरी मस्ती रहे

हां तेरी मस्ती रहे, तेरी मस्ती रहे

तेरे रसिकों पे छायी ये मस्ती रहे

तेरे रसिकों पे छायी ये मस्ती रहे

तेरे चरणों की रज में ठिकाना मिले

तेरे चरणों की रज में ठिकाना मिले

मैं जहाँ भी, मैं जहाँ भी

मैं जहाँ भी रहूँ बरसाना मिले

मैं जहाँ भी रहू बरसाना मिले

हाँ मैं जहाँ भी रहू बरसाना मिले

मैं जहाँ भी रहू बरसाना मिले....

तेरा बरसाना राधे मेरी जान है

मेरे अरमानो की आन है शान है

तेरी गलियों पे चाकर ये कुर्बान है -2

हाँ ये मेरी जान है, ये मेरी जान है

हाँ ये मेरी जान है, ये मेरी जान है

तेरी गलियों पे चाकर ये कुर्बान है

तेरी गलियों पे चाकर ये कुर्बान है

गाऊं जब भी तेरा अफसाना मिले

गाऊं जब भी तेरा अफसाना मिले

मैं जहाँ भी, मैं जहाँ भी

मैं जहाँ भी रहूँ बरसाना मिले

मैं जहाँ भी रहू बरसाना मिले

हाय मैं जहाँ भी रहू बरसाना मिले

मैं जहाँ भी रहू बरसाना मिले.....

खुश रहे तू सदा ये दुआ है मेरी

बरसाना फले ये सदा है मेरी

तेरे चरणों में रहना सजा है मेरी -2

ये सजा है मेरी, ये सजा है मेरी

हाँ ये सजा है मेरी, ये सजा है मेरी

तेरे चरणों में रहना सजा है मेरी

तेरे चरणों में रहना सजा है मेरी

रवि रस का सदा ही दीवाना मिले

रवि रस का सदा ही दीवाना मिले

मैं जहाँ भी, मैं जहाँ भी

मैं जहाँ भी रहूँ बरसाना मिले

मैं जहाँ भी रहूँ बरसाना मिले

हाँ मैं जहाँ भी रहू बरसाना मिले

मैं जहाँ भी रहू बरसाना मिले....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।