मेरी जान है राधा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

अरै रै मेरी जान है राधा

तेरे पै क़ुरबान मै राधा

अरै रै मेरी जान है राधा

तेरे पै क़ुरबान मै राधा

रह ना सकूँगा तुमसे दूर मै

जब भी बने तू राधा, श्याम बनूँगा

जब भी बने तू सीता, राम बनूँगा

तेरे बिना आधा सुबह शाम कहूँगा

तेरे बिना आधा सुबह शाम कहूँगा

आत्मा से राधा राधा नाम कहूँगा

अरै रै मेरी जान है राधा..

सुंदर नैन विशाल मोहिनी सूरत प्यारी है

कितनी ग्वालन गोपियाँ तू सबसे न्यारी है

तुम बिन रास रचाऊं कैसे जानत सारी है

तुम बिन रास रचाऊं कैसे जानत सारी है

शाम की दिल की रानी तू बरसाने वारी है

अरै रै मेरी जान है राधा....

तेरा ही तो नाम पुकारे बंसी मोरी री

गैया भी पहचाने राधा महक तोरी री

तूने किन्ही नैनन से मेरी मन की चोरी री

तूने किन्ही नैनन से मेरी मन की चोरी री

कैसी जोड़ी कृष्ण कारा राधा गोरी री

अरै रै मेरी जान है राधा....

हिचकी आए राधा तेरी याद सताती है

यमुना की लहरों में तेरी झलक सी आती है

सज धज के सखियों मे तू पनघट जाती है

सज धज के सखियों मे तू पनघट जाती है

सूखी धरती मे भी प्रीत के कमल खिलाती है

अरै रै मेरी जान है राधा....

जब भी बने तू राधा, श्याम बनूँगा

जब भी बने तू सीता, राम बनूँगा

तेरे बिना आधा सुबह शाम कहूँगा

तेरे बिना आधा सुबह शाम कहूँगा

आत्मा से राधा राधा नाम कहूँगा

अरै रै मेरी जान है राधा

तेरे पै क़ुरबान मै राधा

रह ना सकूँगा तुझसे दूर मै....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।