साहेब रउरी नोकरी में

संत कबीर
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॥ पावन पाठ ॥

साहेब रउरी नोकरी में बड़ी सुख पाइले।

साहेब रउरी नोकरी में बड़ी सुख पाइले।

वाटे बाटे जाइले , त्रिवेणी नहाइले,

झर झर मोती बरसे ,चुनि चुनि खाइले,

साहेब रउरी नौकरी में बड़ी सुख पाइले...

अष्ट चक्र सोधि सोधि ,गगन में समाइले,

घट ही में करता पुरुष ,चन्द्र दरशाइले,

साहेब रउरी नौकरी में बड़ी सुख पाइले....

घट अंधियारा पंथ नाहिं सूझै,

जगमग ज्योति जहाँ हिरवा जराइले,

साहेब रउरी नौकरी में बड़ी सुख पाइले....

द्वादस कोसवा पर ,संयाजी वस्तु है,

वाही पुरुषवा के ध्यान हम लगाइले,

साहेब रउरी नौकरी में बड़ी सुख पाइले....

कहत कबीर सुनो भाई साधो ,

निशि दिन गुरूजी के चरण दबाइले,

साहेब रउरी नोकरी में बड़ा सुख पाइले,

साहेब रउरी नौकरी में बड़ी सुख पाइले.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।