उज्जैन के महाराज हो

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जय जय श्री महाकाल, जय जय श्री महाकाल

जय जय श्री महाकाल, जय जय श्री महाकाल

उज्जैन के महाराज हो, दिनों के दीनानाथ हो,

तुम कालों के काल हो, बाबा महाकाल हो....

उज्जैन के महाराज हो, दिनों के दीनानाथ हो,

तुम कालो के काल हो, बाबा महाकाल हो.....-2

दरबार में भोले के देखो, झूम-झूम जयकार लगे,

झूम-झूम जयकार लगे, झूम-झूम जयकार लगे

भांग के रसिया भक्तों के संग, झूम- झूम इतराने लगे,

झूम -झूम इतराने लगे, झूम-झूम इतराने लगे -2

हर-हर का जब साथ हो, बम-बम का जयकार हो,

तुम कालो के काल हो, बाबा महाकाल हो,

उज्जैन के महाराज हो, दीनो के दीनानाथ हो.....

मंदिर मैं महाकाल सजे और, ढोल, नागाडा, डमरू बजे

ढोल, नागाडा, डमरू बजे, ढोल, नागाडा, डमरू बजे

झांझ, मंजीरे, शंख, मृदंग, ताशे संग घड़ियाल बजे

ताशे संग घड़ियाल बजे, ताशे संग घड़ियाल बजे -2

तन पे भस्म का भभूत हो, संग मै भंग का रंग हो,

तुम कालो के काल हो, बाबा महाकाल हो,

उज्जैन के महाराज हो, दीनो के दीनानाथ हो.....

मेरे मन मै है महाकाल, मोह न माया न और कोई जाल

मोह न माया न और कोई जाल, मोह न माया न और कोई जाल,

जो कोई पूछे मेरा हाल, मेरे मुख पर जय महाकाल,

मेरे मुख पर जय महाकाल, मेरे मुख पर जय महाकाल -2

बाबा मुझको तार दो, सुन लो मेरी पुकार को,

तुम कालो के काल हो, बाबा महाकाल हो,

उज्जैन के महाराज हो, दीनो के दीनानाथ हो,

तुम कालो के काल हो, बाबा महाकाल हो। ........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।