साँची बता दे नंदलाला

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

साँची बता दे नंदलाला, रूप तेरा क्यों काला,

रूप तेरा क्यों काला, रूप तेरा क्यों काला,

साँची बता नंदलाला, रूप तेरा क्यों काला....

गौरी है तेरी यशोदा मैया, गौरा है तेरे दाऊ भैया,

बाबा नन्द उजियारा, रूप तेरा क्यों काला,

साँची बता नंदलाला, रूप तेरा क्यों काला.....

गौरी है तेरी राधा नन्द किशोरी, बरसाने की है वो छोरी

गौरे हैं सब ग्वाला, रूप तेरा क्यों काला

साँची बता नंदलाला, रूप तेरा क्यों काला...

सही बता दे मोहन प्यारे कैसे स्वामी तुम हो काले

खेल है तेरा निराला, रूप तेरा क्यों काला

साँची बता नंदलाला, रूप तेरा क्यों काला...

मै तो हूँ अब शरण तुम्हारी मैहर करो मोपे बाँके बिहारी,

तेरी जपूँ मैं माला, रूप तेरा क्यों काला

साँची बता नंदलाला, रूप तेरा क्यों काला...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।