जागो हे घनश्याम

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

भोर भई देखो पंछी बोले

जागो हे घनश्याम -2

मईया यशोदा लगी जगाने,

प्यार से लेके नाम -2

भोर भई देखो पंछी बोले

जागो हे घनश्याम -2

प्रात काल की बेला है ये,

शीतल मन्द समीर चल रही

भवरो की टोली पुष्पों से

गुनगुन गुनगुन बात कर रही

रात बीती तारे चुप गए

चाँद गया निझधाम।

भोर भई देखो पंछी बोले

जागो हे घनश्याम -2

गउएं बछड़ो से मिलने को

अपने थान पे लगी रमाने-2

वेद मंत्र और आरध्या की

स्वर भी अब तो लगे सुनाने

कालिया जागी गालिया जागी

जागा ये बृजधाम।

भोर भई देखो पंछी बोले

जागो हे घनश्याम -2

लाल उठो अब आँखे खोलो

मईया जगाये मईया सुनने -2

काम धाम सब पड़े हुए है

दहिया भी तो रखा है

द्धार पाल सखा तुम्हारे

पूछे क्या जगश्याम।

भोर भई देखो पंछी बोले

जागो हे घनश्याम -2

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।