असी तेरे चरना च रहना माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

असी तेरे चरना च रहना माँ

चाहे अपना ले चाहे ठुकरा ले -2

हर पल तेनु धयाँदे हां -2

माँ प्यार साडे नाल पाले

असी तेरे चरना च रहना माँ चाहे अपना ले चाहे ठुकरा ले.....

असी नैना विच वसाई तस्वीर है तेरी माये -2

सुुत्ते होये भाग जगाये साडे मेरिये माये

ऐसी एहिओ मंगदे हां तू माँ प्यार साडे नाल पाले

असी तेरे चरना च रहना माँ चाहे अपना ले चाहे ठुकरा ले.....

उच्चे पहाड़ा ते तू बनाया तू दर मेरिये माये -2

चरना दे नाल के रखी तू मेरिये माये

तनु एहिओ कहना मैं तू माँ प्यार साडे नाल पाले

असी तेरे चरना च रहना माँ चाहे अपना ले चाहे ठुकरा ले.....

रिम्पी कोटकपुरे वाले नु, प्यार चाहिदा तेरा -2

होर कुझ नी मंगदे माँ, दीदार चाहिदा तेरा

दुनिया तो की लेना माँ, तू प्यार साडे नाल पाले

असी तेरे चरना च रहना माँ, चाहे अपना ले चाहे ठुकरा ले.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।