असां ते तैनू रब्ब मन्नेया

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॥ पावन पाठ ॥

तेरे नैना ऐस काफिर

क्या छुपाऊं तुझसे आखिर

तेरे नैना ऐस काफिर

क्या छुपाऊं तुझसे आखिर

तू तो जाने मेरी सारी चोरियां

तेरे पीछे तेरे पीछे

चलदु मैं अँखियाँ मिचे

तेरे हाथों में हैं मेरी डोरियाँ

तू ही चन्न मेरा तू ही मेरी रातां

तू ही धुप मेरी तू ही बरसाता

मैं यारा तैनू सब मन्नेया

तू माने या ना माने दिलदारा

असां ते तैनू रब्ब मन्नेया

तू माने या ना जाने दिलदारा

असां ते तैनू रब्ब मन्नेया -2

दस होर कहदा रब दा द्वरा

हो दस होर कहदा रब दा द्वरा

असां ते तैनू रब्ब मन्नेया

तू माने या ना माने दिलदारा

असां ते तैनू रब्ब मन्नेया......

पहरों पहर तैनू तक्दी जावां

तुझपे मर के मैं जी जावां

हो पहरों पहर तैनू तक्दी जावां

तुझपे मर के मैं जी जावां

तेरी जुदाई यूं तड़पावे

साँस भरुँ तो अंख भर आवे

ओ तेरे बिना नहियो दिल दा गुज़ारा

असां ते तैनू रब्ब मन्नेया

तू माने या ना माने दिलदारा

असां ते तैनू रब्ब मन्नेया -2

नहीं जीना तेरे बाजो मैं नहीं जीना

जग चढ़ जाना नहीं जीना

मैं तां मर जाना नहीं जीना हो हो

है काफी जोगी नू मंदिर काफी

तारों को अम्बर काफी

लहरों को समंदर काफी यारा

सानु काफी तेरे अखा दा ईशारा

सानु काफी तेरे अखा दा ईशारा

असां ते तैनू रब्ब मन्नेया

तू माने ये ना जाने दिलदारा

असां ते तैनू रब्ब मन्नेया......-3

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।