तेरी दया से दादा, मेरा काम हो रहा हैं

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॥ पावन पाठ ॥

दादा, मेरे दादा, मेरे दादा, दादा,

तुमसे जन्मो का हैं मेरा ये नाता..

तेरी दया से दादा, मेरा काम हो रहा हैं,

करता हैं तु प्रभुवर, मेरा नाम हो रहा हैं,

तेरी दया से दादा, मेरा काम हो रहा हैं ॥

मांझी नहीं हैं फिर भी, पतवार चल रही हैं,

तेरे इशारे पर ये, मेरी नांव चल रही हैं ।

ये देख के जमाना, हैरान हो रहा है,

करता हैं तु प्रभुवर, मेरा नाम हो रहा हैं,

तेरी दया से दादा, मेरा काम हो रहा हैं ॥

चलता नहीं हुं फिर भी, मंजिल के पास हुं मैं,

कहते हो तुम प्रभु कि, तेरे आस-पास हुं मैं ।

तेरी दया से तेरा सेवक, मशहूर हो रहा हैं,

करता हैं तु प्रभुवर, मेरा नाम हो रहा हैं,

तेरी दया से दादा, मेरा काम हो रहा हैं ॥

दादा, मेरे दादा, मेरे दादा, दादा,

तुमसे जन्मो का हैं मेरा ये नाता..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।