आदियोगी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

दूर उस आकाश की गहराइयों में

इक नदी से बह रहे हैं आदियोगी

शून्य सन्नाटे टपकते जा रहे हैं

मौन से सब कह रहे हैं आदियोगी

योग के इस स्पर्श से अब

योगमय करना है तन मन

सांस शाश्वत सनन सननन

प्राण गुंजन घनन घननन

उतरे मुझ में आदियोगी

योग धारा छलक छनछन

सांस शाश्वत सनन सननन

प्राण गुंजन घनन घननन

उतरे मुझ में आदियोगी

उतरे मुझ में आदियोगी

पीस दो अस्तित्व मेरा

और कर दो चूरा चूरा

पूर्ण होने दो मुझे और

होने दो अब पूरा पूरा

भस्म वाली रस्म कर दो आदियोगी

योग उत्सव रंग भर दो आदियोगी

बज उठे ये मन सितारी

झनन झननन झनन झननन

सांस शाश्वत सनन सननन

प्राण गुंजन घनन घननन

सांस शाश्वत सनन, सननन

प्राण गुंजन घनन घननन

उतरे मुझ में आदियोगी

योग धारा छलक छनछन

सांस शाश्वत सनन सननन

प्राण गुंजन घनन घननन

उतरे मुझ में आदियोगी

उतरे मुझ में आदियोगी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।