मैया तेरी याद आ गयी,

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अष्टमी के दिन इन आँखों से, उड़ गयी निंदिया रानी,

नवमी के दिन सुबह सुबह मेरे आँख से टपका पानी.

मैया तेरी याद आ गयी, मैया तेरी याद आ गयी,

लाल चुनरिया ओढ़ के बैठी माथे बिंदिया न्यारी,

इन आँखों के आयेज घूमे प्यारी च्चवि तुम्हारी,

तेरी याद मेी भावरावाली, तेरी याद मेी भावरावाली,

सारी रात ना सोया,

कैसे अओ पास तुम्हारे फुट फुट कर रोया,

मैया तेरी याद आ गयी, मैया तेरी याद आ गयी,

मंदिर मेी दो भजन सुनना,तेरे दर्शन करना,

तेरे गाओ के भक्तो के साथ काई दीनो तक रहना,

चाहे जितनी कोशिस करलू,चाहे जितनी कोशिस करलू,

तुमको भूल ना पाऔ,

सारे दुखरे से लेता हू, यह दुख से ना पाऔ,

मैया तेरी याद आ गयी, मैया तेरी याद आ गयी,

अब तो दिल मेी आश् एघी है हो दीदार तुम्हारा,

सपना पूरा हो जाए बस यह अरमान हुमारा,

जितनी जल्दी हो जाए मा,जितनी जल्दी हो जाए मा,

दर पे मुझे बुलले,

दर्शन देके श्याम को मा अपने गले लगा ले,

मैया तेरी याद आ गयी, मैया तेरी याद आ गयी,

अष्टमी के दिन इन आँखों से, उड़ गयी निंदिया रानी,

नवमी के दिन सुबह सुबह मेरे आँख से टपका पानी.

मैया तेरी याद आ गयी, मैया तेरी याद आ गयी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।