तेरे जागेयां दे विच सारी रात मै जागां

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरे जागेयां दे विच सारी रात,मै जागां..

मेरे नाल माँ जागे कायेनात,मै जागां...

तेरे जागेयां दे विच सारी रात,मै जागां...-2

निमि निमि लो पै झड़दे, टिम टिम करदे तारे माँ

चन अम्बर दा मुख तेरे ते, पाउन्दा है लिश्कारे माँ...-2

सब आके भवन तेरे चाह, मै जागां

तेरे जागेयां दे विच सारी रात,मै जागां...

महकां वंड़न फुल बाग दे, ठंडीया तेज़ हवावां नु

हो जाव्ं अज खब्रां छेती, माये दसो दिशावां नु..-2

अज तेरी मेरी होनी मुलाकात,मै जागां

तेरे जागेयां दे विच सारी रात,मै जागां.....

खल खल कर के बहेन लगा, निर्मल पानी नदियां दा

झम झम कर के डीगन लगा, झरना सुखिया सदिया दा..-2

जद हन्जुआं दी होवे बरसात,मै जागां

तेरे जागेयां दे विच सारी रात,मै जागां.....

सूरज टेके मथा तेरे चरनी किरणा पाके माँ

अपने सुत्ते भाग जगाये सागर सीस जुका के माँ -2

करा आरती होव परवा,मै जागां

तेरे जागेयां दे विच सारी रात,मै जागां...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।