॥ पावन पाठ ॥
देखे री हरि नंगमनंगा ..-2
जलसूत भूषन अंग विराजत,
बसन हीन छवि उठत तरंगा।
देखे री हरि नंगमनंगा...2
अंग अंग प्रति अमित माधुरी,
निरखि लजित रति कोटि अनंगा।
देखे री हरि नंगमनंगा...-2
देखे री हरि नंगमनंगा ..-2
जलसूत भूषन अंग विराजत,
बसन हीन छवि उठत तरंगा।
देखे री हरि नंगमनंगा...2
अंग अंग प्रति अमित माधुरी,
निरखि लजित रति कोटि अनंगा।
देखे री हरि नंगमनंगा...-2