मेरे दिल मे तू है

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरे दिल मे तू है,फिर मै हू कहां...-2

तू जहां जहां मै वहाँ वहाँ

जब तू ही तू है फिर मै हू कहां,

मेरे दिल मे तू है,फिर मै हू कहां।

जय वैष्णो माँ जय वैष्णो माँ

तू वैष्णो विश्व की मालक है

तू सारे जग की पालक है

पर्वत क उपर डेरा है

सुन्दर सी गुफ्फा मे बसेरा है

हो मेरे दिल मे तू है,फिर मै हू कहां।

जय वैष्णो माँ जय वैष्णो माँ

जब से माँ तुझको पाया है

सारे जग को मैंने भुलाया है

मेरे मन में तेरी मूरत है

नैनो में तेरी सूरत है

जब तू ही तू है फिर मैं हु कहा

तू युगों युगों से है मईया

चंचल जैसे आये चले गए

तुझे कसम है अपने भक्तो की

जो बिना दर्शन पाए चले गए

जब तू ही तू है फिर मैं हु कहा

तू जहां जहां मै वहाँ वहाँ

जब तू ही तू है फिर मै हू कहां,

मेरे दिल मे तू है,फिर मै हू कहां।

जय वैष्णो माँ जय वैष्णो माँ.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।