दिवा चन दा जगे हवा पूर दी वगे

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

दिवा चन दा जगे, हवा पूर दी वगे।

चल चल संता वे दरबार चलिये।।

मीठी मीठी खुशबू निम्मी तारेया दी लौ

जेडी दुनिया नु तारे ओदे द्वार चलिये।।

दिवा चन दा जगे.....

ऋधी सिद्दियाँ दी दाती जिनू जग जानदा

छोटा वड्डा ऐदे द्वारे आ के झोली तान्दा

आसां पूरियां करे, दुख दिल्लां दे हरे

चल लैं दे लइ ओस कोलो प्यार चलिये

दिवा चन दा जगे.......

जिदे तेज़ नाल नूरी संसार हो रेहा है

लाट्टाँ विचो लाट्टाँ वाली दा दिदार होरे है

दूर पर्वतां ते डेरा, जिदा गुफ्फा च बसेरा

दिल तड़फदा ए ओथे बार बार चलिये

दिवा चन दा जगे....

ओदे द्वारे उतों कोई वी ना खाली आव्दा

महो मांगिय मुरादां सारा जग पाव्दा

दाती पर उप्कारि जिदी शेर दी सवारी

चल करन दे लै ओस्दा दीदार चलिये

दिवा चन दा जगे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।