आ नी कुडिये लाडलिये

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आ नी कुडिये लाडलिये तैनू लाड लडावां

तेरे पैरां दी धुल मै चूम चूम मथे लावां -2

तू कंजक माता दी लगदी ए प्यारी माँ

तू खिड खिड हस्दी ए सरे जग तो न्यारी माँ -2

तेरे कोमल चरणा तो बलिहारि जावाँ

तेरे पैरां दी धुल मै चूम चूम मथे लावां

आ नी कुडिये लाडलिये तैनू लाड लडावां.....

तेरे मोतियां वर्गे दन्त मारदे ने लिश्कारे

सूरज चन्दा तारे तेरे तेज़ तो हारे -2

तेरे होठां उते लाडो सब दे लइ दुआवां

तेरे पैरां दी धुल मै चूम चूम मथे लावां

आ नी कुडिये लाडलिये तैनू लाड लडावा....

तू सब दा मन्ग्दी भला किसे दा बुरा ना चावें

तू माँ प्यां दे नाल रनिये दुख दर्द वन्डावे -2

तू अपने सिर ते ले ल्वे अप्निया ब्लावं

तेरे पैरां दी धुल मै चूम चूम मथे लावां

आ नी कुडिये लाडलिये तैनू लाड लडावां.....

तैनू बुरियां नज़रा नाल क्यों तक्दा है ज़माना

तैनू कलेयां किद्रे भेज के चंचल मै डर जाना -2

हो मैया झंडेवालिये ऐनू किथे लुकांवा

ऐना भोलिआ भालिआ बच्चीआ ते कर अपनीआ छावा

तेरे पैरां दी धुल मै चूम चूम मथे लावां

आ नी कुडिये लाडलिये तैनू लाड लडावां.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।