जय जय श्री बदरीनाथ आरती

पारंपरिक
विष्णु भगवान आरती विष्णु भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

जय जय श्री बदरीनाथ, जयति योग ध्यानी।

निर्गुण सगुण स्वरूप, मेघवर्ण अति अनूप,

सेवत चरण सुरभूप, ज्ञानी विज्ञानी। जय जय...

झलकत है शीश छत्र, छवि अनूप अति विचित्र,

वरनत पावन चरित्र सकुचत बरबानी। जय जय...

तिलक भाल अति विशाल, गले में मणिमुक्त माल,

प्रनतपाल अति दयाल, सेवक सुखदानी। जय जय...

कानन कुडण्ल ललाम, मूरति सुखमा की धाम,

सुमिरत हो सिद्धि काम, कहत गुण बखानी। जय जय...

गावत गुण शम्भु, शेष, इन्द्र, चन्द्र अरु दिनेश,

विनवत श्यामा जोरि जुगल पानी। जय जय...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।