ऐसी पिलाई साकी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ऐसी पिलाई साकी,

कुर्बान हो चुके हम,

अब तक रहे जो बाकी,

अरमान खो चुके हम।।

करते हो दिल्लगी तुम,

अव्वल बनाके पागल,

कूचे में तेरे आकर,

बदनाम हो चुके हम,

ऐसी पिलायी साकी,

कुर्बान हो चुके हम।।

पहला ही जाम भरकर,

ऐसा हमे पिलाया,

सारी अक्ल हुनर खो,

नादान हो चुके हम,

ऐसी पिलायी साकी,

कुर्बान हो चुके हम।।

बिल्कुल नही रहे अब,

दुनिया के काम के कुछ,

बस अब तो तेरे दर के,

मेहमान हो चुके हम,

ऐसी पिलायी साकी,

कुर्बान हो चुके हम।।

रहती हवस ये दिल में,

भर भर के जाम पियें,

इनकार तुम ना करना,

इकरार कर चुके हम,

ऐसी पिलायी साकी,

कुर्बान हो चुके हम।।

ऐसी पिलाई साकी,

कुर्बान हो चुके हम,

अब तक रहे जो बाकी,

अरमान खो चुके हम।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।