लाल चुनरिया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

लाल गुलाल है लाल सुमन

लाल गुलाल है लाल सुमन

ले माँ लाल डलरिया

लाल है चुनरी, लाल है चूड़ी

लाल है माँ की अचरिया

लाल रंग माँ तेरा शृंगार है

नौ रूपों में माँ तेरा अवतार है

चमके है कीर्ति मेहरावालिये

शेरावालिये…!

लाल चुनरिया… हाय

लाल लाल चुनरी, लाल चूड़ी

गोरे हाथों में सुहाय रे

लाल चुनरिया… हाय… लाल चुनरिया

लाल गुलाल है लाल सुमन

लाल गुलाल है लाल सुमन

ले माँ लाल डलरिया

लाल है चुनरी, लाल है चूड़ी

लाल है माँ की अचरिया

सागर से गहरा है माँ तेरा प्यार

ममता बहे माँ के अचरा से

शृंगार सुन्दर सुहागन पे

महर तेरी बरसे बदरा से

हाँ चूड़ी नथिया पुष्प कहार…

हाँ चूड़ी नथिया पुष्प कहार

माँ का करे सोलह शृंगार

सोहे है तुझपे सुन्दर लाल चुनरिया

लाल चुनरिया… हाय

लाल लाल चुनरी, लाल चूड़ी

गोरे हाथों में सुहाय रे

लाल चुनरिया… हाय… लाल चुनरिया

साँझ सबेरा तेरे चौखट पे

मेरा बसेरा तेरी चौखट पे

दुनिया का फेरा तेरे चौखट पे

इस दर से जायें कहाँ

प्रीत तेरी माँ बस गयी मुझमे

मैं पगली हाँ खो गयी तुझमें

कारे बदरा जब छाए

लहराए तेरी चुनरिया

लाल चुनरिया… हाय

लाल लाल चुनरी, लाल चूड़ी

गोरे हाथों में सुहाय रे

लाल चुनरिया… हाय… लाल चुनरिया

लाल गुलाल है लाल सुमन

लाल गुलाल है लाल सुमन

ले माँ लाल डलरिया

लाल है चुनरी, लाल है चूड़ी

लाल है माँ की अचरिया....-2

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।