बिगड़ी बना दो संतोषी माता

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

बिगड़ी बना दो संतोषी माता

कुछ तोह करो माँ संतोषी माता

अर्ज सुनो मोरि संतोषी माता

विपदा ऐसी आन पड़ी हैं

डसती हैं यह बैरण रतिया

सूनी सूनी सेज पड़ी है

किरपा करो दुःख यह

हरो मदत करो

बिगड़ी बना दो संतोषी माता

ॐ शान्ति शनी नमः

दुःख तोह लगाये

बैठे हैं दिन रात

दर्द से मेरा कहो

कैसा हैं नाता -2

कोई नहीं हैं पास

बस एक तेरी आस

हमको दूजा यहाँ

कोई न भाता

ओ माँ मेरी निर्बल मनन को

तुम बल डोरी तुम बल डोरी

किरपा करो दुःख यह

हरो मदत करो

बिगड़ी बना दो संतोषी माता

विपदा ऐसी आन पड़ी हैं

डसती हैं यह बैरण रतिया

सूनी सूनी सेज पड़ी है

किरपा करो दुःख यह

हरो मदत करो

बिगड़ी बना दो संतोषी माता.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।