दूर है नगरिया माँ की

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

दूर है नगरिया माँ की दूर है नगरिया

दूर है नगरिया माँ की दूर है नगरिया

लाल है ध्वजाये माँ की लाल है चुनरिया

लाल है ध्वजाये माँ की लाल है चुनरिया

दूर हे नगरिया माँ की दूर है नगरिया

दूर है नगरिया माँ की दूर है नगरिया

आदि तू अनादि मैया काली का भवानी माँ

तेरे मंदिर पर सोभे त्रिशूल की निशानी माँ-2

माँ ऊंचे ऊंचे इस पर्वत की

ऊंचे ऊंचे इस पर्वत की कठिन है डगरिया

दूर है नगरिया माँ की दूर है नगरिया

दूर है नगरिया माँ की दूर है नगरिया

कुमकुम और केसर तेरे रूप को निखरते

चाँद और तारे तेरी आरती उतारते-2

डोल डोल पुरवइया भी डोल डोल पुरवइया भी

मारती लहरिया

दूर है नगरिया माँ की दूर है नगरिया

दूर है नगरिया माँ की दूर है नगरिया

महिषासुर मर्दिनी देवी आरशुर वाली माँ

दुष्ट देती सुम्भ निशुम्भा को मारा तूने काली माँ-2

तूने खोली सबकी माँ तूने खोली सबकी माँ

पाप की गठरिया

दूर है नगरिया माँ की दूर है नगरिया

लाल है ध्वजाये माँ की लाल है चुनरिया

दूर है नगरिया....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।