ऐसा वर दो कांगड़े वाली

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ऐसा वर दो कांगड़े वाली

जागरण तेरा कराता रहु।

ढोलक जांच मंजीरों के संग नाच नाच के गाता रहु।।

बड़े भाग से ये तन मिलता

जन्म जन्म के बंदो से।

फिर भी मोह माया फसते अपने गोरख धंधों से।

भावना मन में एक यही है

दर्शन तेरे पाता रहु।

ढोलक जांच मंजीरों के संग नाच नाच के गाता रहु।।

ऐसा वर दो.....

जगती है जब तेरी ज्योति दूर कष्ट हो जाते है

जपके तेरे नाम की माला भक्ति में खो जाते है।

और... तन मन धन की नहीं है परवाह

बस ये नियम निभाता रहु।

ढोलक जांच मंजीरों के संग नाच नाच के गाता रहु।।

ऐसा वर दो......

ऐमिल का ये अर्थ है शर्मा

आ मिल आ मिल भोली माँ।

मेरे माथे पर लग जाये शुभ चरणों की धूली माँ।

रोगो से मुक्ति मिल जाये ऐसी दवा बनाता रहु।

ढोलक जांच मंजीरों के संग नाच नाच के गाता रहु।।

ऐसा वर दो......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।