मेरी शेरों वाली माँ सदा मेरे साथ रहो

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ना मांगू मैं कुछ और सदा मेरे साथ रहो

मेरी शेरोंवाली माँ सदा मेरे साथ रहो। -2

रिश्ते नाते हुए बेगाने सब ने दिया मुझे देखा

तुम ही मेरी सच्ची सहाई तुम पे मुझे भरोसा।

जो मुश्किल में मैं गबराया तुमने साथ निभाया

मेरा मुझमे कुछ नहीं माँ

सभ तुमसे ही आया।

कर तेरा मेरा डयनं सदा मेरे साथ रहो।

ना मांगू मैं कुछ और सदा मेरे साथ रहो

मेरी शेरोंवाली माँ सदा मेरे साथ रहो।

तुम जो सर पर हाथ रखो तो संकट मिट जाता

मुश्किल को मैं देखके दाती कभी नहीं घबराता।

तुम से जुड़ा है मईया मेरा वंधन प्रीत का नाता

तेरे सिवा अब मुझे दातिए कुझ भी नहीं सुहाता ।

अब जाऊ मैं किस और फैसला तुम ही करो

ना मांगू मैं कुछ और सदा मेरे साथ रहो

मेरी शेरोंवाली माँ सदा मेरे साथ रहो।

ममता की मूरत माँ तुम हो अपनी शरण में रखना

चरण कमल से मईया मुझको दूर कभी ना करना।

तेरे आँचल की शया में मईया मेरा बसेरा

करुणा अपनी मुझपर मईया तुम बरसाते रहना

न तोडना प्रीत की डोर सदा तुम साथ रहो।

ना मांगू मैं कुछ और सदा मेरे साथ रहो

मेरी शेरोंवाली माँ सदा मेरे साथ रहो।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।