इक ठौर चाहिये

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन विष्णु भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

थक गया हूँ चलते चलते

इक ठौर चाहिये।

तेरे चरणों के सिवाय

ठिकाना ना और चाहिये।

भटक रहा है मन

डगर है बहुत अँधेरी

राह दिखाये ऐसी

इक भोर चाहिये।

तेरे चरणों के सिवाय

ठिकाना ना और चाहिये।

थक गया हूँ चलते चलते

इक ठौर चाहिये।

डगमगा रही है कश्ती

भँवर बहुत हैं गहरे

डूब रहा हूँ तुम्हारे होते

तुम कैसे मांझी ठहरे

थामों पतवार आके

मुझे छोर चाहिये।

तेरे चरणों के सिवाय

ठिकाना ना और चाहिये।

थक गया हूँ चलते चलते

इक ठौर चाहिये।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।