तरस रही हैं दर्शन को अंखियाँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

पलक पाँवड़े बिछाए हैं बैठे

मैया आ जाओ।

तरस रही हैं दर्शन को अंखियाँ

दर्श दिखा जाओ।

तम छाया है घोर घनेरा

विकट संकट ने है घेरा

करने दूर अँधियारा मैया

मन में जोत जगा जाओ।

तरस रही हैं दर्शन को अंखियाँ

दर्श दिखा जाओ।

घेरे हुए है पापों का घेरा

मन में है दुःखों का डेरा

करने को उपकार मैया

करुणा बरसा जाओ।

पलक पाँवड़े बिछाए हैं बैठे

मैया आ जाओ।

तरस रही हैं दर्शन को अंखियाँ

दर्श दिखा जाओ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।