नगरी नगरी द्वारे द्वारे ढूंढू सांवरिया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

नगरी-नगरी द्वारे-द्वारे ढूँढूँ रे सांवरिया

कान्हा - कान्हा रट के मैं तो हो गई रे बावरिया

बेदर्दी मोहन ने मोहे फूँका ग़म की आग में

बिरहा की चिंगारी भर दी दुखिया के सुहाग में

पल-पल मनवा रोए छलके नैनों की गगरिया

नगरी-नगरी द्वारे-द्वारे...

आई थी अँखियों में लेकर सपने क्या-क्या प्यार के

जाती हूँ दो आँसू लेकर आशाएं सब हार के

दुनिया के मेले में लुट गई जीवन की गठरिया

नगरी-नगरी द्वारे-द्वारे...

दर्शन के दो भूखे नैना जीवन भर न सोएंगे

बिछड़े साजन तुमरे कारण रातों को हम रोएंगे

अब न जाने रामा कैसे बीतेगी उमरिया

नगरी-नगरी द्वारे-द्वारे...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।