नन्दी रे मेरी बात सुनादे भोले भण्डारी ते

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

नन्दी रे मेरी बात सुनादे , भोले भंडारी ते

भोले भण्डारी ते सुनादे भोले भण्डारी ते

मेरा दुःख आज बतादे , भोले भण्डारी ते

1 ) दरद भरी है मेरी कहानी , बहुत घणा दुखियारा हूँ

कहना चाहू कह नही पाऊँ , में किस्मत का मारा हूँ

सोई किस्मत जगवादे , भोले भण्डारी ते

नन्दी रे मेरी बात सुनादे , भोले भंडारी ते

2 ) भोला मंदिर में बैठया , में खुली हवा में रहता हूँ

उसके पाँव दबावे सेवक , घणे कष्ट में सहता हूँ

कष्ट मेरा मिटवादे , भोले भण्डारी ते

नन्दी रे मेरी बात सुनादे , भोले भंडारी ते

3 ) वो छत्तीस पकवान उड़ावे , यहाँ खान के टूक नही

शिव शिव शिव में रटू रात दिन , इसमें कोई चूक नही

मने इक बार मिलवादे , भोले भण्डारी ते

नन्दी रे मेरी बात सुनादे , भोले भंडारी ते

4 ) तेरे कान में कह रहया भूलन शंकर तेरी सुनते है

सब कहते नन्दी जी सुनके , सब बातों को गुनते है

मेरी बिगड़ी बनवादे , भोले भण्डारी ते

नन्दी रे मेरी बात सुनादे , भोले भंडारी ते

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।