गुरुजी मेरे कर्मो की

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॥ पावन पाठ ॥

गुरु जी मेरे कर्मों की पोथी ना खोलना

न्याय तराजू में ना तोलना…….2

गुरु जी मेरे कर्मों की पोथी ना खोलना

1 ) पाप ना जानू , पुण्य ना जानू

बस तुमको ही , अपना मानूं

करना कभी भी , डावांडोल ना

गुरु जी मेरे कर्मों की पोथी ना खोलना

2 ) मोहमाया में , हम हैं उलझे

अंतर्यामी , तू सब समझे

खोल मजबूरों की तू पोल ना

गुरु जी मेरे कर्मों की पोथी ना खोलना

3 ) आन पड़ा हूं , चरणों में तेरे

कर ना हिसाब तू , कर्मों का मेरे

साहिल को ऐसे टटोल ना

गुरु जी मेरे कर्मों की पोथी ना खोलना

4 ) एक भरोसा , तुझमें अटल है

ओ . पी निर्बल का , एक तू बल है

बस यही मुझको , है बोलना

गुरु जी मेरे कर्मों की पोथी ना खोलना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।